बकरीद पर ढील : सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को लताड़ा, कहा- अगर संक्रमण फैला तो कार्रवाई होगी

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने केरल की सरकार को बकरीद के त्‍यौहार के अवसर पर 18-20 जुलाई के बीच कोविड 19 के दिशा निर्देशों पर छूट देने पर लताड़ लगायी है। जस्टिस रोहिंटन नरीमन और जस्टिस बीआर गवई की बेंच दिल्‍ली के निवासी पीकेडी नांबियार की उत्‍तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को रोकने की हस्‍तक्षेप याचिका की सुनवाई कर रही थी।


हांलाकि कोविड 19 की महामारी के चलते उत्‍तरप्रदेश की सरकार ने कांवड़ यात्रा को रद्द करने का फैसला किया और इसी के चलते सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर रोक लगा दी थी, केरल की सरकार ने अपने आदेश को सही ठहराते हुए जवाब में एक हलफनामा दायर किया। अपने हलफनामा में उन्‍होंन कहा कि बकरीद के चलते काफी लंबे समय से व्‍यापारियों ने माल जमा किया था, उन्‍हीं को ध्‍यान में रखते हुए छूट दी गई थी और साथ ही कोविड 19 के प्रसार को रोकने के उपायों को भी अपनाया गया है। आदेश के अनुसार फुटवेयर, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और आभूषण की दुकान उन क्षेत्रों में 8 बजे तक खुले रहेगी जहॉं कोविड 19 की सकारात्‍मकता दर 15 प्रतिशत से कम है और जहॉं कोविड 19 का प्रभाव ज्‍यादा है वहाँ सिर्फ सोमवार को छूट मिलेगी। हांलाकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी जगहों में छूट देना अनुचित है।


बेंच ने कहा कि यह स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। किसी के दबाव में सरकार ने इस तरह की छूट देकर देश के नागरिकों के लिए राष्‍ट्रव्‍यापी महामारी के जोखिम को बढ़ा दिया है। हम केरल सरकार को संविधान के अनुच्‍छेद 21 के तहत निहित जीवन के अधिकार पर ध्‍यान देने का निर्देश देते हैं।

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि हम केरल सरकार को संविधान के अनुच्‍छेद 21 और सीआरपीसी की धारा 144 पर ध्‍यान देने और कांवड़ यात्रा मामले में दिए गए हमारे आदेश को पालन करने का निर्देश देते हैं।

किसी भी तरह का दबाव भारत के नागरिकों के जीवन सबसे कीमती अधिकार जीवन के अधिकार का उल्‍लंघन नहीं कर सकता है। अगर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो कोई भी इसे हमारी जानकारी में ला सकता है और उसके मुताबिक ही कार्रवाई की जाएगी।

 

कांवड़ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

कोविड 19 की महामारी के बढ़ने से सुप्रीम कोर्ट ने उत्‍तरप्रदेश की सरकार से उनके कोविड प्रोटोकॉल के तहत कांवड़ यात्रा की अनुमति देने वाले फैसले पर पुर्नविचार करने को कहा था, जिसके बाद उत्‍तरप्रदेश की सरकार ने इस साल कांवड़ यात्रा को रद्द कर दिया था। उन्‍होंने कोर्ट को कहा था कि कोविड 19 की महामारी के बढ़ने कारण लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य को देखते हुए पिछले साल की तरह इस साल भी उत्‍तरप्रदेश में हर जिलों के कांवड़ संघ की लिखित सहमति के बाद इस साल कांवड़ यात्रा को रद्द कर दिया गया है और अब इस मामले को बंद करना जरूरी है। हमने सभी स्‍तरों के अधिकारियों को सीआरपीसी की धारा 144 पर ध्‍यान देने का निर्देश दिया है, लोगों की जिंदगी को नुकसान पहुंचाने वाली अ‍प्रिय घटनाओं पर कड़ी नजर रखने और उन पर तत्‍काल कार्रवाई की जाएगी।

 

 

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