साउथ अफ्रीका में अपाथ्रीड के बाद इस समय सबसे भयानक हिंसा हो रही है। पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा के जेल जाने के बाद लगातार भारतीयों पर हमले हो रहे हैं। 2009 से 2018 के बीच जैकब जुमा जब साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति थे, उस समय लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने पर कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने का दोषी पाते हुए जैकब जुमा को जेल हुई थी। समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक दंगों में 1700 लोगों को गिरफतार किया और करीब 72 लोगों की मौत हो गई है। यह दंगे जैकब जुमा को जेल से बाहर निकलवाने के लिए किए जा रहे हैं।
भारत का संबंध इन जैकब जुमा के भ्रष्टाचार के
साथ उत्तरप्रदेश के सहारनपुर के अजय गुप्ता, अतुल गुप्ता
और राजेश गुप्ता के कारण जुड़ा है। साउथ अफ्रीका में अपाथ्रीड खत्म होने के बाद
नेल्सन मंडेला के शासन के दौरान 1993 में गुप्ता भाई उत्तरप्रदेश के सहारनपुर
से साउथ अफ्रीका आए और यहा सहारा कंप्यूटर्स के नाम से अपना पहला पारिवारिक व्यवसाय
शुरू किया था और इसके बाद बहुत ही कम समय में गुप्ता भाईयों ने एयर ट्रेवलस्, एनर्जी, माइनिंग, टेक्नोलॅाजी
और मीडिया के क्षेत्र में अपना व्यवसाय फैला लिया था।
जैकब जुमा के कार्यकाल के दौरान गुप्ता भाईयों
का एएनसी की सरकार के ऊपर अच्छा खासा दबदबा था, इसके बाद
2015-16 के सहारा समारोह में गुप्ता भाईयों की जैकब जुमा के साथ बहुत अच्छे
संबंध बन गए थे। 2016 में 773$ मिलिन की संपत्ति के साथ अतुल
गुप्ता साउथ अफ्रीका के सातवें सबसे अमीर शख्स बन गए थे। जैकब जुमा और गुप्ता
भाईयों के संबंध घनिष्ठ तब हुए जब से जैकब जुमा के बच्चे दुदुजाइल जुमा और
दुदुजाने जुमा और जैकब जुमा की एक पत्नी बोंगी नगेमा जुमा ने गुप्ता भाईयों के
साथ में व्यवसाय शुरू किया था। इसी के चलते इन दो परिवारों से लोग बहुत गुस्सा
हो गए थे, एक शब्द जुप्तास् प्रचलन में आया था।
गुप्ता और जुमा परिवारों की मिलीभगत के कई
उदाहरण है जैसे 2016 में जैकब जुमा की कैबिनेट की नियुक्तियों में गुप्ता भाईयों
के प्रभुत्व के कारण उनकों फायदा पहुंचाने वाले कैबिनेट के सदस्यों को फाइनेंस
मिनिस्ट्री और पब्लिक डिपार्टमेंट में अहम पद मिले थे। ऐसे ही 2017 में 1 लाख
हैक्ड ई-मेल से पता चला था कि सरकार ने जो व्रेदे फार्म प्रोजेक्ट के लिए जिस
अकाउंट में फंड डाला था वो अतुल गुप्ता से जुड़ा था। इसको लेकर जनता ने जुमा को
हटाने की मांग करते हुए बहुत विरोध प्रदर्शन किए थे।