शनिवार को सूत्रों से पता चला कि उत्तर प्रदेश के चुनावों की तैयारी शुरू करते हुए, बीजेपी ने राज्य में होने वाले 2022 के विधानसभा चुनावों के लिए अपने शीर्ष नेतृत्व को उतारने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित दोनों उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मोर्या और दिनेश शर्मा और बीजेपी नेता स्वतंत्र देव और महेंद्र सिंह चुनाव लड़ेगे। बीजेपी के पास अभी 403 में से 312 सीटों का भारी बहुमत है और उसका लक्ष्य 300 से ज्यादा सीटें जीतने का है।
सूत्रों के अनुसार योगी आदित्यनाथ
जो वर्तमान में विधानसभा परिषद से मनोनीत है, वो अपने गृह जिला गोरखपुर की किसी भी सीट से चुनाव लड़ेंगे। ऐसे ही दूसरे
एमएलसी डॉ़ केशव प्रसाद मोर्या कौशांबी के सिराथु से, दिनेश
शर्मा लखनऊ से और महेंद्र सिंह प्रतापगढ़ के कुंडा से चुनाव लड़ेंगे। अभी हाल में कोविड
प्रबंधन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारिफ करते हुए प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने यू.पी. चुनाव अभियान की शुरूआत की। सूत्रों ने बताया है कि जल्द
ही यू.पी की कैबिनेट का विस्तार होगा, हाल ही में केंद्रीय
कैबिनेट में भी यू.पी से सात मंत्री बनाए गए है।
बीजेपी के द्वारा सीएम के तौर
पर योगी के चेहरे की घोषणा करने से पहले, योगी आदित्यनाथ ने 10-11 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पॉर्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित बीजेपी के
शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। सूत्रों ने बताया है कि पार्टी के नेतृत्व और सरकार
में बदलाव की कोई भी संभावना नहीं है, केंद्र और राज्य के
नेतृत्व के दूरिया को कम करने के लिए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक समन्वय
समीती का गठन किया जाएगा। हाल ही में आरएसएस और बीजेपी के कई शीर्ष नेताओं ने
यू.पी. का दौरा किया और कोविड प्रबंधन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की
प्रशंसा की।
अब तक बहुत से मोर्चे सत्ताधारी
बीजेपी को चुनौती देने के लिए सामने आ चुके है। सुहलदेव भारतीय समाज पॉर्टी का
एआईएमआईएम, आजाद समाज पॉर्टी और
प्रगतिशील समाज पॉर्टी के साथ गठबंधन होते दिख रहा है,
शिवसेना, आम आदमी पॉर्टी और जीडीयू जैसी पॉर्टियों ने यू.पी.
का चुनाव लड़ने की घोषणा की है। समाजवादी समाज पॉर्टी और बहुजन समाज पॉर्टी ने
गठबंधन न करने का फैसला करते हुए, कांग्रेस के लिए अपने
दरवाजे बंद कर दिए है, हांलाकि जरूरत पड़ने पर वो छोटी
पॉर्टियों के साथ गठबंधन कर सकते हैं। इसके बाद से कांग्रेस ने प्रियंका गांधी के
नेतृत्व में राज्य में अक्रामक तरीके से प्रचार किया है और अपने दम पर वापसी की
आस कर रहे हैं। 2017 में यादव परिवार में लड़ाई के बीच अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल
को पॉर्टी से निकालर, मुलायम सिंह यादव को पॉर्टी के अध्यक्ष
के पद से हटा दिया। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन
किया, राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने एकसाथ रैलियां की। लेकिन
सिर्फ 55 सीट जीतने से यह गठबंधन बहुत बुरी तरह से विफल रहा,
जबकि बीजेपी ने 312 सीटें जीतीं और योगी आदित्यनाथ ने अपने पहले कार्यकाल की शुरूआत
की।