महामारी और लॉकडाउन में सेक्स वर्कर्स की स्थिति

कोविड-19 महामारी के चलते पूरे देश में कई बार पिछले 1 वर्ष में पूर्ण लॉकडाउन और नाईट कर्फ्यू हुए । लॉकडाउन के  कारण कई लोगों की नौकरी चली गई और कई लोगों के व्यापार बंद हो गए । कोविड 19 ने बहुत बुरी तरह से पूरे देश के लोगों और हर क्षेत्र के लोगों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है, लेकिन इसी बीच एक ऐसा क्षेत्र भी है, जो हमारे समाज का हिस्सा है लेकिन ज्यादातर लोग उसको हमारे समाज का हिस्सा नहीं मानते और ना ही उनके लिए कोई चिंता है. लोग उनको हमारे समाज का हिस्सा माने या न माने, लेकिन फिर भी वो लोग हमारे समाज का हिस्सा है. उसमें काम कर रहें लोग भी बहुत बुरी तरह से महामारी से प्रभावित हुए है. मैं बात कर रहा हूं सेक्स वर्कर की, कोविड-19 के चलते हर क्षेत्र की तरह इस क्षेत्र में काम कर रहे लोग भी बहुत बुरी तरह से प्रभावित हुए है. सेक्स वर्कर इस समय बहुत मुश्किलों का सामना कर रही है. सेक्स वर्कर को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. जब लॉकडाउन होता है तो सब चीज बंद होनी की समस्या, आर्थिक स्थिति खराब होनें के कारण ग्राहक का न आना और सबसे बड़ी समस्या बीमारी के डर से ग्राहकों न आना. कोविड 19 ऐसी बीमारी जो लोगों के संपर्क में आने से फैलती है, इसी डर से लोग डर रहे है और उनका डर सही भी है. लेकिन इन सब के कारण उन की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो गई है. कई वर्कर्स भुखमरी से बहुत ज्यादा परेशान है, कईयों ने काम छोड़ दिया है और कई ने तो शहर छोड़कर अपने गाँव चली गई है.
ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्कर्स (AINSW) की अध्यक्ष कुसुम ने बताया कि दिल्ली में 60% से अधिक सेक्स वर्कर अपने गृह राज्य वापस चले गई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक,दिल्ली में कुल पंजीकृत 5,000 सेक्स वर्कर रहती हैं।" मतलब लगभग 3,000 सेक्स वर्कर वापस अपने गृह राज्य चले गई है. एक एन जी ओ की और से कोर्ट में पेश होते वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने कोर्ट को बताया था कि आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना में 1.2 लाख सेक्स वर्करों का सर्वे किया है जिसमें यह सामना आया है कि 96% सेक्स वर्कर (1,15,374 महिलाएं) और ट्रांसजेंडर ने अपनी कमाई का स्रोत खो दिया है. इनमें से 71% तो अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने और अपनी आजीविका को भी नहीं चला पा रही है. 33% सेक्स वर्कर के पास दिन में तीन बार भोजन खाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं है. टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में मल्लिका (31) बताती है कि वो पिछले छह वर्षों से बेंगलुरु के मैजेस्टिक बस टर्मिनल के पास काम करती है. वह यात्रियों और स्थानीय लोगों के साथ अपना व्यापार करती थी और अपनी कमाई से अपने दो बच्चों को पलती थी, लेकिन कोविड 19 के संकट और लॉकडाउन से वो बेरोजगार हो गई है. कोविड 19 महामारी के चलते सोशल डिस्टेंसिंग और शारीरिक संपर्क से बचने के बाद अपनी आजीविका खो दी थी। 
बेंगलुरु में रहने वाली सेक्स वर्कर आमना ने न्यूज़ वेबसाइट द न्यूज़ मिनट को एक इंटरव्यू में बताया कि उनके घर में  सारा राशन खत्म रहा है। गैर सरकारी संगठनों से कुछ मदद के बावजूद, वह कहती है कि वह अपने जीवन-यापन के लिए संघर्ष कर रही है। “मुझे मधुमेह है और मेरे दो स्कूल जाने वाले बच्चे हैं। हमारे पास मेरे बच्चों की शिक्षा, मेरी दवा और घर का किराया सहित खर्च है। मैंने जो कुछ कमाया वह भी अब खर्च हो गया है। एक एनजीओ ने हमें राशन और दवाएं दीं, लेकिन सीमित राशन से हम कब तक जीवित रह सकते हैं?”
बैंगलोर की ललिता ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में बताया है कि महामारी से एक दिन पहले वो 400-1,000 रुपये के बीच कमा लेती थी, लेकिन मार्च में लागू होने वाले देशव्यापी लॉकडाउन के बाद से उसने एक रुपया भी नहीं कमाया। उसने कहा कि कोई आय नहीं है और नौ लोगों के परिवार में मां, बेटे और बेटी और उनके पति, उनके तीन बच्चों और खुद को खिलाने के लिए - जीवित रहना लगभग असंभव है, उसने कहा मेरा बेटा और दामाद एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करते थे लेकिन उनके मालिक ने उन्हें लॉकडाउन के दौरान भुगतान करना बंद कर दिया। 
महामारी के दौरान एन.जी.ओ ने की मदद :
कोरोना महामारी के दौरान सेक्स वर्कर को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन अगर कई सेक्स वर्करों का गुज़रा हो पाया तो एन. जी.ओ. के कारण हो पाया है। इन लोगों की मदद के लिए कुछ संघठन और एन. जी.ओ.  सामने आए जिससे कई लोगों की मदद हुई बैंगलोर के साधना महिला संघ एनजीओ ने लॉकडाउनराशन के दौरान सेक्स वर्करों को राशन की सामग्री देके उनकी मदद की है.
इसी तरह कोलकाता की दरवार महिला समन्वय समिति ने महामारी और उसके बाद के लॉकडाउन के कारण परेशानी का सामना कर रहीं सेक्स वर्करों की मदद के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। दरवार महिला समन्वय समिति की याचिका पर कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से सेक्स वर्कर की मदद करने के लिए कहा।

Post a Comment

Previous Post Next Post