पुस्तक : सेवासदन (उपन्यास)
लेखक : मुंशी प्रेमचंद
प्रकाशन का वर्ष : 1919
रेटिंग : 4/5
सेवासदन मुंशी प्रेमचंद का प्रसिद्ध उपन्यास है। मुंशी प्रेमचंद ने सेवासदन उपन्यास पहले में उर्दू भाषा में बाज़ार-ए-हुस्न के नाम से लिखा था। इसके बाद में सन में उन्होने इसका हिन्दी अनुवाद स्वयं किया। लेकिन पहले हिंदी उपन्यास सेवासदन का प्रकाशन 1919 में हुआ था और बाज़ार-ए-हुस्न का प्रकाशन 1924 में हुआ था। सेवासदन उपन्यास हिंदी में युग परिवर्तन करने वाला उपन्यास है। सेवासदन के माध्यम से मुंशी प्रेमचंद ने समाज में नारी पराधीनता, वेश्याओं के जीवन, दहेज प्रथा और मध्यम वर्ग के लोगों की समस्याओं को चित्रित किया है। सेवासदन की कहानी बनारस की है। कहानी में कृष्णचंद्र एक बहुत ही ईमानदार पुलिस अधिकारी होते है. ईमानदारी के नौकरी करने के कारण उनकी बड़ी बेटी सुमन की शादी एक अच्छे परिवार में दहेज की मांग के चलते नहीं हो पा रही थी. इसलिए वह अपनी दो बेटियों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए रिश्वत लेना शुरू कर देते है। एक दिन रिश्वत का भेद खुलने पर थानेदार साहब को जेल हो जाती है और वह सलाखों के पीछे पहुंच जाते है। परिवार पर संकट आ जाता है। उनकी पत्नी सारी कमाई उन्हें रिहा करने की कोशिश में खर्च कर देती है। सुमन को उसके चाचा के घर भेज दिया जाता है। जहाँ चाचा के परिवार वाले उसके साथ बहुत बुरा व्यवहार करते है। भारत में, विशेष रूप से २०वीं शताब्दी में कम दहेज में किसी लड़की की शादी करना बहुत कठिन काम था, लेकिन सुमन के चाचा उमानाथ उसकी शादी करने के लिए एक गरीब आदमी गजाधर को खोजने में कामयाब रहते है। सुमन की शादी का आधार बेमेल होता है। सुमन जो अपने पिता के घर में विलासिता के ज़िंदगी जीके आई थी, एक गरीब आदमी के घर मे उसका आदर्श पत्नी बनना बहुत कठिन था। गरीबी के कारण दोनों पति-पत्नी के बीच मनमुटाव शुरू हो जाता है। उसका पति उसके चरित्र के ऊपर शक भी करता था। एक दिन घर में देर से आने के कारण गजाधर सुमन पर उसके चरित्र पर गलत इल्जाम लगाते हुए घर से निकाल देता है। गजाधर के द्वारा घर से निकाले जाने के कारण कुछ दिनों के लिए सड़कों और इधर-उधर बनारस में रहने का मजबूर हो जाती है। उसकी स्थिति को देखकर, एक महिला उसे अपने घर ले जाती है और भोली की शरण में जाके सुमन तवायफ बन जाती है। जेल से छूटने के बाद जब कृष्णचन्द्र बाहर आते है और उन्हें पता चलता है कि उनकी बेटी सुमन वैश्या हो गई तो वह नदी में डूबकर आत्महत्या कर लेते है। चूंकि सुमन वेश्यावृत्ति को अपनाती है, इसलिए उसकी छोटी बहन को उसके पति और अन्य लोगों द्वारा कठोर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। समाज दोनों महिलाओं के खिलाफ हो जाता है। सुमन की छोटी बहन का तलाक हो जाता है। वहीं ब्रिटिश सरकार कुछ शहरों में स्थानीय लोगों को नगरपालिकाएं चलाने की अनुमति देती है। नतीजतन नगर पालिका की नई टीम रेड लाइट एरिया को शहर से बाहर शिफ्ट करने का आदेश देती है. सामाजिक कलंक के कारण और बहन की शादी बचाने के लिए सुमन वेश्यालय छोड़ देती है। अतः में सुमन एक घर में वेश्याओं के बच्चों को पढ़ाना शुरू कर देती और उस घर का नाम रहता सेवासदन। प्रेमचंद की एक खासियत रहती है वो एक ही उपन्यास से समाज की बहुत सारी विकृतियों और बहुत सारी बुराईयों को चित्रित कर देते थे। सेवा सदन के माध्यम से भी उन्होंने स्त्रियों की समाज में स्थिति, वेश्याओं की स्थिति, लोगों के दोहरे पन, समाज में व्याप्त दहेज की समस्या को चित्रित किया है। सेवासदन के माध्यम से मुंशी प्रेमचंद ने हमारे समाज में व्याप्त दहेज की व्यवस्था का चित्रण किया। उस समाज का चित्रण किया जहां दहेज के बिना शादी नहीं हो सकती। प्रेमचंद द्वारा चित्रित दहेज जैसी कुप्रथा आज और भी ज़्यादा खतरनाक रूप में हमारे समाज में विधमान है। इंसान के पास कितनी भी काबिलियत हो लेकिन अगर उसके पास पैसे नहीं है तो उसकी शादी अच्छे घर में नहीं हो सकती। उन्होंने हमारे समाज लोगों के दोहरे चरित्र का भी चित्रण किया है। उन्होंने बताया समाज में लोग दुनिया के सामने वेश्याओं का विरोध करते हुए उन्हें तुच्छ समझते है, उनके बारे में लोगों से बात करना भी सही नहीं समझते और न ही उन्हें समाज का हिस्सा मानते है। लेकिन वही लोग समाज और लोगों से छुपकर उनके पास जाते है, उनके ऊपर पैसे खर्च करके उनका दीदार करते हुए उनके साथ वक्त बिताते है। प्रेमचंद चित्रित करते है कि हमारा समाज ऐसा है कि शादी में वेश्याओं का नाच ज़रूर होना चाहिए, लेकिन वही समाज के लोग किसी से रिश्ता इसलिए तोड़ देते है क्योंकि उसकी बहन वेश्या है. प्रेमचंद ने उपन्यास के माध्यम से बेमेल विवाह के ऊपर भी ध्यान केंद्रित किया है। सुमन जैसी सुंदर लड़की की शादी उससे उम्र में बहुत बड़े आदमी के साथ कर ढ़ी जाती है। सुमन एक पुलिस अफसर की बेटी होती है इसलिए उसको खाने पीने की कभी भी कमी नहीं होती लेकिन गरीब घर में आकर उसको खाने पीने के भी लाले पड़ जाते हैं और उनका रिश्ता टूट जाता है। प्रेमचंद ने आज से 100 साल से पहले जिन समस्याएं को इस उपन्यास के माध्यम से चित्रित किया था। वो आज भी कुछ सुधार के साथ हमारे समाज चाहे वो स्त्री की स्थिति की बात हो या दहेज की समस्या या समाज का दोहरापन सब वैसे का वैसा ही है।
अभय पांडेय