रमिन बहारानी की फ़िल्म व्हाइट टाइगर की समीक्षा

व्हाइट टाइगर की बात करे तो इसको निर्देशन किया रमिन बहारानी ने । यह फ़िल्म 2008
में आये अरविंद अडिगा के इसी नाम के नोबल के ऊपर बेस्ड है। फिल्म में आदर्श गौरव मुख्य भूमिका में हैं, साथ में राजकुमार राव, महेश मांजरेकर प्रियंका चोपड़ा ने भी काम किया हैं।

इस फिल्म की कहानी की बात करे तो इसकी कहानी को इसका मुख्य पात्र बलराम हलवाई (आदर्श गौरव) अपनी कहानी दर्शकों को सुनाता हैं | बलराम की कहानी शुरू होती हैं लक्षमणगढ़ से ,एक गरीब परिवार में बलराम का जन्म होता हैं , बचपन में वो पढ़ाई में बहुत होशियार रहता और इसी के चलते उसको दिल्ली में पढ़ाई करने की स्कॉलरशिप मिलती हैं । लेकिन पिता जमींदार का कर्ज अकेले नहीं चुका पाते जिसके चलते बलराम को अपनी पढ़ाई छोड़कर चाय की दुकान में काम करने लगता हैं और कुछ ही दिन बाद उसके पिता की मौत हो जाती हैं। फिर उसकी जवानी तक यही सिलसिला चलता हैं। एक बार गांव के जमींदार (महेश मांजरेकर) का बेटा अशोक (राजकुमार राव) गांव में आता और उसको देखकर उसके दिमाग में यह आता कि यही वो आदमी हैं जिसकी बदौलत वो ज़िन्दगी में तरक्की कर सकता और इसकी चलते वो उसका ड्राइवर बनने की सोचता हैं । इसी क्रम में वो धनबाद शहर में उनके घर पहुँच जाता है । उसको अशोक और उसकी पत्नी पिंकी (प्रियंका चोपड़ा) के सेकंड ड्राइवर के तौर पर  रख लिया जाता है । इसी बीच  पिंकी और अशोक अपने काम के लिए दिल्ली जाने वाले होते हैं । वो भी उनके साथ दिल्ली जाना चाहता हैं लेकिन उसे दिल्ली जाने का मौका नहीं मिलता क्योंकि वो उनका सेकंड ड्राइवर होता है पहले हक मिलता है फर्स्ट ड्राइवर को  । फर्स्ट ड्राइवर 20 साल से जमींदार के यहाँ अपनी पहचान छुपा के हिन्दू के तौर पर काम करता और असल में वो मुसलमान होता है । इसी को लेके बलराम  उसे ब्लैकमेल करता हैं जिसके चलते फर्स्ट ड्राइवर अपनी नौकरी छोड़ कर चला जाता है और अशोक को दिल्ली जाने का मौका मिलता है । बलराम के छोटी जाति के होने के बावजूद अशोक और पिंकी उसको इज्जत और सम्मान देतें हैं । पिंकी के जन्मदिन के दिन पिंकी और अशोक शराब पिए रहते हैं और पिंकी गाड़ी चलाती है और नशे में होने की वजह से पिंकी से सड़क से निकल रहे  बच्चे का एक्सीडेंट हो जाता है और उसकी जान भी चली जाती हैं । अशोक का पिता और भाई बलिराम से कन्फेशन के लेटर में यह साइन करवा लेते हैं कि उस रात को ही गाड़ी वही चला रहा था और एक्सीडेंट भी उसी ने ही किया है । हालांकि गवाह ना होने से किसी को जेल नहीं होती हैं  । पिंकी चाहती है कि अशोक उसके साथ अमेरिका चले लेकिन अशोक जब राजी नहीं होता तो इसके चलते वो अमेरिका उसको छोड़ कर चले जाती है और अशोक बहुत ज्यादा दुखी होता है उसे शराब की लत लग जाती है और इस समय बलराम उसका बहुत ज्यादा ख्याल रखता है । अशोक एक बड़ा व्यापार करना चाहता और इसी के चलते वो 
बड़े-बड़े नेताओं को पैसा देने जाता है । बलराम की नजर इसी बैग में रहती है और वो यह सोचने लगता हैं कि वो किसी भी तरह से इस बैग को चुरा कर ले जाए, लेकिन उसे डर लगता अगर वो बैग चुरा लेगा तो यह लोग उसके परिवार को मार देंगे । इसी दौरान बलराम की दादी बलराम के पास उसका एक भतीजा भेज देती है । एक दिन बलराम को पता चलता है कि अशोक  उसके नौकरी से निकालना चाहता हैं तो, तब बलिराम डिसाइड करता है की उसको किसी भी तरह से वो बैग लेना है जिसमें पैसे और वो अशोक का मर्डर कर देता है । वो अशोक का मर्डर करके पैसे लेके बेंगलुरु अपने भतीजे के साथ चला जाता हैं और वहा जाकर वो एक बहुत बड़ी टैक्सी सर्विस का मालिक बन जाता और अपना नाम अशोक शर्मा कर लेता है । इस कहानी के माध्यम से लेखक ने बताने की कोशिश की है कि भारत में आज भी हमारे देश में कई ऐसे लोग हैं कई ऐसे समुदाय हैं और खासकर छोटी जाति के लोग जो अपनी पारिवारिक स्थिति के कारण पढ़ाई में अच्छे होते हुए भी उसे छोड़ देते हैं । वो बहुत कुछ अच्छा कर सकते हैं लेकिन नहीं कर पाते । ऐसा ही बलराम के पिता की मौत इसलिए हो जाती है क्योंकि उसके गांव में कोई भी अस्पताल नहीं होता हैं इतना बीमार होने के बावजूद भी उन्हें पैदल दूसरे गांव में जाना पड़ता है । दूसरे गांव में जब वो अस्पताल में पहुंच भी जाते हैं तो वहां पर डॉक्टर नहीं होता है । इस सीन के माध्यम से उन्होंने हमारे देश की 
 जो लाचार स्वास्थ्य व्यवस्था है उसको भी दर्शाया है ।  जमींदार के घर पर जो ड्राइवर पिछले 20 साल से काम करता है वो मुस्लिम रहता हैं लेकिन उसको अपना नाम बदलना पड़ता हैं क्योंकि उर्दू नाम साथ हमारे देश में कई लोगों को न काम मिलता हैं और न रहने को घर मिलता हैं। पिंकी से एक्सीडेंट होता है लेकिन उसके बाद जमींदार बिना बलराम से पूछे सारा इल्जाम उसके ऊपर डाल देते हैं कहीं ना कहीं ये अमीरों के द्वारा गरीबों पर अत्याचार करने की प्रवृत्ति को भी चित्रित करता है और अशोक के द्वारा कुछ ना बोलना भी बताया जाता है कि किस तरह हमारे देश में गरीब अत्याचार सहते हैं और कुछ बोलते भी नहीं । बलराम द्वारा चोरी और मर्डर करना यह भी दिखाता हैं कि पैसे की लालच के लिए जो व्यक्ति किसीको कितना भी चाहे लेकिन वो कभी भी बदल सकता हैं | फिल्म में मुख्य किरदार निभाया कुमार गौरव ने उनकी अदाकरी मुझे प्रभावशाली लगी । राजकुमार राव और प्रियंका चोपड़ा ने भी अपना किरदार ठीक से निभाया । फिल्म का नरेशन और सिनेमैटोग्राफी भी संतोषजनक रही। मेरी तरफ से फिल्म को 4 स्टार सही रहेंगे।

1 Comments

Previous Post Next Post