हमारे देश में आज किसानो के आन्दोलन को करीबन 6 महीने हो गए हैं। यहाँ तक कि दिल्ली के सिंधु बॉर्डर में बैठे, अपने घर परिवार को छोड़कर आये किसानों को भी करीबन तीन महीने हो गए हैं । किसान संघठन और सरकार की बीच 11 बार बातचीत हो चुकी हैं । लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया हैं। अब किसान संघठन 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन टैक्टर रैली निकालने की तैयारी में हैं। सरकार अब कह ही हैं कि वो इन बिलों को 18 महीने तक लागू नहीं करेंगी।
आंदोलन की शुरुआत :
इस आंदोलन की शुरुआत सितंबर के महीने से हुई जब केंद्र ने 3 नए कानून लेके आई। यह तीनों कानून थे , ''कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण), 2020', ''कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत अश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक, 2020'' और 'आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक । जैसे यह कानून लागू हुए उसके बाद किसानों ने आंदोलन करना शुरू कर दिया । 25 सितंबर 2020 को किसानों ने इन तीनों कानून के विरोध में भारत बंद किया । इन कानूनों पर किसानों का कहना हैं कि इससे एम.एस.पी और मंडी सिस्टम खत्म हो जायेगा, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से किसान सीधे कंपनी के टच में होगा, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग
के दौरान अगर कुछ विवाद हुआ तो उसका निर्णय एस.डी. एम. करेगा , और किसानों के पास कोर्ट में जाने का विकल्प नहीं बचेगा। कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग से उद्योगपतियों के द्वारा किसानों की जमीन छीन लेगें और बिना मंडी के उनकी उपज कौन खरीदेगा। इन्ही सब मुद्दों के कारण इसके बाद से किसानों का आंदोलन शुरू हो गया । इसका ज्यादातर प्रभाव पंजाब, हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश में देखा गया। हालांकि तमिलनाडु ,केरल, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक और ओडिशा में आंदोलन हुए। इसके बाद किसान संघठनो ने दिल्ली चलो आंदोलन शुरू किया और किसान संघठनो में दिल्ली की और कूच करना शुरू किया । किसानों को दिल्ली तक पहुँचने के लिए कई दिक्कत का सामना करना पड़ा। उनकी पुलिस के साथ झड़प हुई , उनके ऊपर वाटर कैनन से पानी की भौछार की गई। तमाम परेशानी के बाद किसान सिंधु बॉर्डर पहुँच गए। लेकिन जब किसानों ने दिल्ली कूच किया तो इसकी आग देशभर में फैली. अब करीबन 3 महीना हो गया है, तब से किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं । सरकार से इनकी 11 बार की वार्ता भी हो गई हैं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा हैं। इसी के चलते किसानों का आन्दोलन चल रहा हैं।
किसानों की मांगे यह हैं जिनके चलते उनकी सरकार से बात नहीं बन पा रही हैं।
1.सदन में विशेष सत्र बुलाकर इन तीनों बिलों को रद्द किया जाये।
2. फसलों की खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लिख के दे।
3.यह भी लिख के दे यह नियम हमेशा लागू रहेगें ।
4.स्वामीनाथन पैनल की रिपोर्ट लागू करें और फसल के उत्पादन में जो औसत लागत लगती हैं। उससे कम से कम 50% से अधिक एमएसपी तय की जाए।
5. कृषि उपयोग के लिए डीजल की कीमतों में 50 प्रतिशत तक कटौती करें।
6.एनसीआर में एयर क्वालिटी मैनेजमेंट के लिए जो आयोग बना हैं ,आसन्न अध्यादेश 2020 और पराली जलाने पर सजा और जुर्माना लगने वाले कानूनों को निरस्त करे ।
7. पंजाब में पराली जलाने के लिए जिन किसानों को गिरफ्तार किया गया हैं। उन किसानों को रिहा किया जाए।
8.विद्युत अध्यादेश 2020 को समाप्त किया जाय।
9.केंद्र को राज्य के विषयों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
10.किसान नेताओं के खिलाफ मामलों को वापस लेते हुए उनकी रिहाई की जाए।
सरकार का पक्ष
सरकार का पक्ष नए कृषि कानूनों से कृषि के क्षेत्र में बहुत ज्यादा सुधार आएगा । सरकार कह रही हैं कि नए कृषि कानून से एमएसपी की व्यवस्था खत्म नहीं होगी। पहले की तरह एमएसपी से खरीद होती रहेगी। सरकार ने कृषि उपज मंडियों को लेकर भी पहले ही साफ कर दिया है कि मंडियों को कोई खतरा नहीं है। मंडियां पहले की तरह बनी रहेंगी अच्छी बात ये होगी कि किसान बिचौलियों के चंगुल से निकल जाएंगे। किसान की मंडी में उपज बेचने की बाध्यता भी खत्म हो चुकी है किसान जहां चाहे अपनी उपज बेच सकता है। सरकार नें एक मीटिंग में यह भी कह दिया हैं कि वो लिखित में देने को तैयार हैं कि एमएसपी की व्यवस्था व्यवस्था चालू रहेगी और मंडी सिस्टम को भी जारी रहेगा।
*.कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में अगर विवाद होता है , तो किसानों को स्थानीय कोर्ट जाने का हक भी मिलेगा ।
*.सरकार यह भी कह रही कि आंदोलन से जुड़े जिन किसानों पर हुए केस को भी वो वापस लेने को भी तैयार हैं।
* विद्युत अध्यादेश 2020 को समाप्त करने को भी तैयार हैं ।
Thank-you Bro
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